वो जो मालिक हैं सभी के वो शिफ़ा देंगे तुम्हें
इन दु'आओं के सिवा दूर से क्या देंगे तुम्हें
जब भी चाहेंगे बहा लेंगे ज़रा से आँसू
जब भी चाहेंगे निगाहों से गिरा देंगे तुम्हें
क्या सितम है वही इक रोज़ नहीं आता है
सोचते रोज़ हैं इक रोज़ भुला देंगे तुम्हें
गाँव की सड़कें बता देंगी हमारी हालत
सूखते पेड़ इशारों से पता देंगे तुम्हें
हम जो चाहें वो ख़ुदा ही हमें दे सकता है
तुम जो चाहोगे वो मांँ बाप दिला देंगे तुम्हें
लोग जो मिलते हैं हँसता हुआ चेहरा ले कर
इन से बचना कि यही लोग रुला देंगे तुम्हें
— Aditya Singh aadi














