इन्हें पाला है अपनी बोटियों पर
मेरे एहसान हैं तन्हाइयों पर
फलों से जब तलक रिश्ता रखेंगे
सितम होता रहेगा डालियों पर
तमन्ना भी है दिल में ख़ुद-कुशी की
भरोसा भी नहीं है भाइयों पर
हमेशा बेड़ियों का ज़िक्र करना
कभी जब शे'र कहना चूड़ियों पर
तुम्हें राहत मिलेगी हिचकियों से
नज़र फेरो हमारी चिट्ठियों पर
निकल जाऊँगा इक लंबे सफ़र को
मैं अपना नाम लिख कर पटरियों पर
बहुत दूर आ गए उन की गली से
नज़र अबतक टिकी है खिड़कियों पर
मेरी तलवार पैनी कर रहा है
तेरा हँसना मेरी कमज़ोरियों पर
निशानी मिट गई ज़ख़्मों की लेकिन
लहू के दाग़ तो हैं पट्टियों पर
— Aditya Singh aadi














