रास आता नहीं फल देर से पकने वाला
दिल है सीने में ज़रा तेज़ धड़कने वाला
जिस को दुनिया ने समुन्दर का लक़ब बख़्शा है
एक क़तरा है इन आँखों से छलकने वाला
कौन देखेगा अगर टूट भी जाऊँ किसी रोज़
मैं सितारा हूँ उजालों में चमकने वाला
अपने पिंजरे में इसे क़ैद न कीजे साहब
दिल परिंदा है परिंदा भी चहकने वाला
मुझ से पहले भी कई लोग हुए हैं 'आदी'
मैं अकेला नहीं उल्फ़त में बहकने वाला
— Aditya Singh aadi














