Meaning of

क़तरा

qatra • اللہ ری

बूंद; थोड़ी मात्रा; सार

drop; small quantity; essence

قطرہ; تھوڑی مقدار; جوہر

Arabic

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना — Mirza Ghalib
मिल जाऊँगा दरिया में तो हो जाऊँगा दरिया सिर्फ़ इस लिए क़तरा हूँ कि मैं दरिया से जुदा हूँ — Nazeer Banarasi
आँसू आँसू जिस ने दरिया पार किए क़तरा क़तरा आब में उलझा बैठा है — Mashkoor Husain Yaad
तारे नफ़स पर उँगली रख दी छेड़ के तू ने बात ग़ज़ल की नोके क़लम से क़तरा-क़तरा जारी हैं रिशहात ग़ज़ल की — Navneet krishna
कोई कहता था समुंदर हूँ मैं और मिरी जेब में क़तरा भी नहीं — Kaifi Azmi
चाँद बैठा हुआ है पहलू में क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ मैं — Siraj Faisal Khan
ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है समुंदरों ही के लहजे में बात करता है — Waseem Barelvi
मैं क़तरा हूँ मगर दरिया का फ़न मालूम है मुझ को कि मेरे दर पे फिर कोई समुंदर क्यूँ नहीं आता — Rakesh Mahadiuree
सुनो जानाँ तुम्हारे लब पे मय का एक भी क़तरा मेरी आँखों की है तौहीन और नाकाबिल-ए-बर्दाश्त — Firdous khan

'क़तरा' का मूल अर्थ एक छोटी बूंद है, अक्सर पानी की। कविता में, यह एक विशाल चीज़ के सार का प्रतीक बन जाता है, जैसे एक बूंद में समंदर का समावेश। यह कुछ छोटा लेकिन गहरा होने का विचार प्रस्तुत करता है, जिसमें अनंत की संभावना होती है।

'क़तरा' का उपयोग कवि अक्सर छोटेपन और विशालता के विरोधाभास को दर्शाने के लिए करते हैं। यह एक अकेले आँसू का प्रतिनिधित्व कर सकता है जो दुख का भार रखता है या स्याही की एक बूंद जो दुनिया बनाती है। यह 'दरिया' के साथ विपरीतता में होता है, जो सीमित और विस्तृत के बीच के अंतर को दर्शाता है।

कविता की दुनिया में, 'क़तरा' अनंत संभावनाओं का वाहक बन जाता है, सूक्ष्म में ब्रह्मांड की याद दिलाता है।