Meaning of

क़ाएनात

qaa'inaat • قائنات

ब्रह्मांड; सृष्टि; जगत

universe; cosmos; creation

کائنات; کُلیات; تخلیق

Arabic

चाँद फूल ख़ुशबू हुस्न में मज़ा तो है मगर
बंदगी से अच्छा कुछ भी काएनात में नहीं

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

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ख़ुदा की इतनी बड़ी काएनात में मैं ने
बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला

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दिलासा देते हुए लोग क्या समझ पाते
हम एक शख़्स नहीं काएनात हारे थे

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दिल गया रौनक़-ए-हयात गई
ग़म गया सारी काएनात गई

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बे-फ़र्श-ओ-बाम सिलसिला-ए-काएनात के
इस बे-सुतूँ निज़ाम में तू भी है मैं भी हूँ

बे-साल-ओ-सिन ज़मानों में फैले हुए हैं हम
बे-रंग-ओ-नस्ल नाम में तू भी है मैं भी हूँ

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तू ने ये क्या ग़ज़ब किया मुझ को भी फ़ाश कर दिया
मैं ही तो एक राज़ था सीना-ए-काएनात में

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इश्क़ से इल्तिफ़ात मेरी है
ये नई वारदात मेरी है

मैं ने चाहा है इतनी शिद्दत से
यार वो काएनात मेरी है

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यहाँ हर एक शख़्स में बसर है हब्स-ए-क़ायनात
जिसे भी देखो वो यहाँ ख़ला का इक दयार है

कभी मिलेंगे मोड़ पर यहीं जहाँ खड़ा हूँ मैं
ये इब्तिदा का दौर है अभी तुझे ख़ुमार है

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कि हस्ब-ए-काएनात में जो मुस्कुरा रहा हूँ मैं
ख़िज़ाँ में जैसे गुल खिला है मौसम-ए-बहार का

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चाँद फूल ख़ुशबू हुस्न में मज़ा तो है मगर
बंदगी से अच्छा कुछ भी काएनात में नहीं

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

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क़ाएनात शब्द ब्रह्मांड की विशालता और रहस्य को उजागर करता है। अपने मूल अर्थ में, यह सम्पूर्ण सृष्टि, उस ब्रह्मांड का उल्लेख करता है जो मानव समझ से परे है। कविता ने इस शब्द को अनंतता, अज्ञात और सभी चीजों की परस्पर संबंधिता के विषयों को खोजने के लिए अपनाया है।

कवि अक्सर 'क़ाएनात' का उपयोग प्रेम की असीम प्रकृति या ज्ञान की अनंत खोज को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक व्यक्ति के भीतर के विशाल भावनात्मक परिदृश्य या जीवन की अनंत संभावनाओं का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'क़ाएनात' सीमित के भीतर अनंत को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है। यह हमें महान योजना में हमारे स्थान पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।