यहाँ हर एक शख़्स में बसर है हब्स-ए-क़ायनातजिसे भी देखो वो यहाँ ख़ला का इक दयार हैकभी मिलेंगे मोड़ पर यहीं जहाँ खड़ा हूँ मैंये इब्तिदा का दौर है अभी तुझे ख़ुमार है— Raj Tiwari