
दुनिया जैसे चलती फिरती यादों का इक मेला है
ध्यान से देखो भीड़ यहाँ तुम हर इक शख़्स अकेला है
तुम कहते हो इश्क़ करोगे! दाग़ है उस के दामन में
इश्क़ हुआ जब क्यूँ सोचूँ मैं क्या ख़ालिस क्या मैला है
— Raj Tiwari
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