Meaning of

क़ाब

qaab • قاب

थाली; परात; पात्र

dish; platter; container

تھالی; پرات; ظرف

Arabic

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख — Allama Iqbal
उस के बदन को दी नुमूद हम ने सुखन में और फिर उस के बदन के वास्ते इक क़बा़ भी सी गई — Jaun Elia
एक चेहरे से उतरती हैं नक़ाबें कितनी लोग कितने हमें इक शख़्स में मिल जाते हैं — Khalil Ur Rehman Qamar
अब तो बीमार-ए-मोहब्बत तेरे क़ाबिल-ए-ग़ौर हुए जाते हैं — Dagh Dehlvi
अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला — Munawwar Rana
इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ — Moghisuddin Fareedi
इतनी जल्दी न गिरा अपने हसीं रुख़ पे नक़ाब तू मुझे ठीक से हैरान तो हो लेने दे — Rajesh Reddy

अपने मूल अर्थ में, 'क़ाब' एक साधारण पात्र या थाली को संदर्भित करता है, उपयोगिता और उद्देश्य का एक बर्तन। कविता में, यह एक प्रतीक बन जाता है समाहित करने और अर्पित करने का, जिसमें वह सार होता है जो साझा या ग्रहण किया जाना है। 'क़ाब' की छवि पोषण के विचारों को जगाती है, शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों रूप से, और देने और प्राप्त करने के कार्य को।

'क़ाब' का उपयोग कवि अक्सर हृदय को भावनाओं के पात्र के रूप में करने के लिए करते हैं। यह आत्मा की प्रेम या दुख को समाहित करने की क्षमता का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द खालीपन के विपरीत है, पूर्णता और प्रचुरता का सुझाव देता है।

'क़ाब' अपनी काव्यात्मक सार में हमें यह सोचने के लिए आमंत्रित करता है कि हम क्या धारण करना चुनते हैं और क्या छोड़ देते हैं। यह हृदय की असीम क्षमता की याद दिलाता है।