Meaning of

क़बा़

qaaba • قبا

वस्त्र; परिधान

robe; garment

لباس; پوشاک

Arabic

उस के बदन को दी नुमूद हम ने सुखन में और फिर उस के बदन के वास्ते इक क़बा़ भी सी गई — Jaun Elia
तितलियाँ ख़ून से तर यूँँ ही नहीं फिरती बशर काँटे फूलों की क़बा ओढ़ के खिलते हैं यहाँ — Dharmesh bashar
हर एक शय से हसीं शय है ये मोहब्बत भी तराश दे जो ये पत्थर को भी ख़ुदा कर दे — Mohak Pandey
अगर ख़ुदा बनते पत्थर को तराश के फिर तो हर इंसान ख़ुदा का ख़ुदा होता — Meenakshi Masoom
किसी की शक़्ल में पत्थर तराश लेने से ऐ अहमखों कहाँ परवरदिगार बनता है — Amaan Haider
ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं — Faiz Ahmad Faiz
इतना यक़ीं ख़ुदा ने तुम को तराश कर फिर इक बार हाथ अपने चू में ज़रूर होंगे — Ravi 'VEER'
उदासी ज़िंदगी की इक क़बा होती है मेरे दोस्त अदाकारी लगी है ज़िंदगी भर मुस्कुराने में — Raj Tiwari

क़बा़ केवल एक वस्त्र नहीं है; यह पहचान और स्थिति का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर उस बाहरी आवरण का प्रतिनिधित्व करता है जो आंतरिक आत्म को छुपाता है, या यह जीवन में निभाई जाने वाली भूमिकाओं का रूपक हो सकता है।

कवि 'क़बा़' का उपयोग पहचान, भेष, और दिखावे और वास्तविकता के बीच के विरोधाभास के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह व्यक्तित्व की परतों या पहने जाने वाले मुखौटों का प्रतीक हो सकता है।

कविता में क़बा़ अस्तित्व की द्वैतता पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है, जहाँ जो देखा जाता है वह हमेशा वास्तविक नहीं होता।