Meaning of

क़बा़

qaaba • قبا

वस्त्र; परिधान

robe; garment

لباس; پوشاک

Arabic

उदासी ज़िंदगी की इक क़बा होती है मेरे दोस्त
अदाकारी लगी है ज़िंदगी भर मुस्कुराने में

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उस के बदन को दी नुमूद हम ने सुखन में और फिर
उस के बदन के वास्ते इक क़बा़ भी सी गई

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ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में
हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं

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तितलियाँ ख़ून से तर यूँँ ही नहीं फिरती बशर
काँटे फूलों की क़बा ओढ़ के खिलते हैं यहाँ

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तल्ख़ बातों से ही मल्बूस न रहती है ज़बाँ
मीठे अल्फ़ाज़ ज़बानों को क़बा देते हैं

मैली पोशाक लपेटे वो मलंगों से लोग
मस्त होने पे ख़ुदा तक भी बना देते हैं

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हर एक शय से हसीं शय है ये मोहब्बत भी
तराश दे जो ये पत्थर को भी ख़ुदा कर दे

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इतना यक़ीं ख़ुदा ने तुम को तराश कर फिर
इक बार हाथ अपने चू
में ज़रूर होंगे

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अगर ख़ुदा बनते पत्थर को तराश के
फिर तो हर इंसान ख़ुदा का ख़ुदा होता

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अदीब दुनिया समझ रही है तो क्यूँँ न ख़ुद को वहीद कर लूँ
तराश कर हर हुनर को अपने मज़ीद मुर्शिद मुरीद कर लूँ

रदीफ़ बाँधूँ ग़ज़ल में ऐसा हर इक मआ'नी फ़रीद कर लूँ
जरीद लूँ क़ाफ़िए के अश'आर मैं सभी अब शदीद कर लूँ

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किसी की शक़्ल में पत्थर तराश लेने से
ऐ अहमखों कहाँ परवरदिगार बनता है

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उदासी ज़िंदगी की इक क़बा होती है मेरे दोस्त
अदाकारी लगी है ज़िंदगी भर मुस्कुराने में

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उस के बदन को दी नुमूद हम ने सुखन में और फिर
उस के बदन के वास्ते इक क़बा़ भी सी गई

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क़बा़ केवल एक वस्त्र नहीं है; यह पहचान और स्थिति का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर उस बाहरी आवरण का प्रतिनिधित्व करता है जो आंतरिक आत्म को छुपाता है, या यह जीवन में निभाई जाने वाली भूमिकाओं का रूपक हो सकता है।

कवि 'क़बा़' का उपयोग पहचान, भेष, और दिखावे और वास्तविकता के बीच के विरोधाभास के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह व्यक्तित्व की परतों या पहने जाने वाले मुखौटों का प्रतीक हो सकता है।

कविता में क़बा़ अस्तित्व की द्वैतता पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है, जहाँ जो देखा जाता है वह हमेशा वास्तविक नहीं होता।