
बे-फ़र्श-ओ-बाम सिलसिला-ए-काएनात के
इस बे-सुतूँ निज़ाम में तू भी है मैं भी हूँ
बे-साल-ओ-सिन ज़मानों में फैले हुए हैं हम
बे-रंग-ओ-नस्ल नाम में तू भी है मैं भी हूँ
— Akbar Hyderabadi
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