
तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ
जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ
एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है
एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
— Fauziya Rabab
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