सोलह सिंगार
ये और बात कि मजबूर हो गई है तू
ये और बात कि मौक़े' हज़ार तुझ को मिले
अमीर बाप की बेटी है ख़ूब-सूरत भी
ग़लत ही होगा के मुझ सेा गँवार तुझ को मिले
जो मिल रहा है उसे अपना ले कहीं शायद
उसी की बाँहों में दिल का क़रार तुझ को मिले
मेरे अलावा तेरी जिस किसी से शादी हो
उसी के प्यार में मेरा भी प्यार तुझ को मिले
मुझ ऐसे पेड़ बने ही हैं पतझड़ों के लिए
तू ख़ुश-नसीब है अहल-ए-बहार तुझ को मिले
मेरा तो एक ही सपना था जो कि टूट गया
दुआ करूँंँगा मैं सोलह सिंगार तुझ को मिले
— Aditya Singh aadi














