तेरा ज़िक्र इस लिए भी किया नए आशिक़ों को पता लगे
तेरी बात उतनी बुरी नहीं तेरी बात कर के बुरा लगे
मेरे दोस्तों मेरे दुश्मनों जो भी दिल में है वो निकाल लो
मुझे इश्क़ ने वो बना दिया जिसे बद-दुआ भी दुआ लगे
मैं ये कहना तो नहीं चाहता मगर आज भी मेरी चाह है
कोई हादसा मुझे ढूंँढ ले कोई तीर सीने में आ लगे
तुझे देख क्या लिया इक नज़र तुझे क्या लगा मुझे प्यार है
नई लड़कियों सा ये दिल नहीं जो कहीं किसी से भी जा लगे
मेरी बद-दुआ है ओ बे-वफ़ा तेरा हुस्न इतना अज़ीम हो
तुझे दोस्तों की नज़र लगे तुझे दुश्मनों की दवा लगे
मैं पला हूँ ऐसे मकान में जहाँ क़ाएदे भी क़फ़स के हों
जहाँ ज़हर लगती हों रोटियांँ जहाँ सांँस लेना सज़ा लगे
मुझे मंदिरों से ग़िला नहीं न ही मस्जिदों से ख़फ़ा हूँ मैं
मुझे उस ख़ुदा की तलाश है जो कि वाक़ई में ख़ुदा लगे














