तुम ज़रा और पास आ जाते
मेरे होश-ओ-हवा से आ जाते
एक बोतल पे जितना ख़र्च हुआ
उतने में सौ गिलास आ जाते
तेरी दहलीज़ दूर है वरना
जब भी होते उदास आ जाते
तेरे छोड़े हुए न होते तो
सारी दुनिया को रास आ जाते
काश बचपन में लौट जाता मैं
सब पुराने लिबास आ जाते
— Aditya Singh aadi














