ख़ूब आता है तअल्लुक़ को निभाना उस को
जो मिलेगा वो बना लेगी दिवाना उस को
उस ने ख़ुद ही मुझे मजबूर किया है वरना
चाहता कौन था यूँ छोड़ के जाना उस को
मेरी तस्वीर जो सीने से लगा बैठी है
मेरी बिगड़ी हुई तक़दीर दिखाना उस को
मैं तेरे शहर में मशहूर नहीं हूँ फिर भी
कोई पूछे तो मेरा नाम बताना उस को
इस से बढ़कर मैं उसे और सज़ा क्या दूँगा
याद रक्खेगा मेरे साथ ज़माना उस को
— Aditya Singh aadi














