Meaning of

बढ़कर

badhkar • بڑھ کر

आगे; अधिक; पार

beyond; surpassing

آگے; زیادہ; پار

Sanskrit

तुम से बढ़कर कौन दुनिया में मेरे नज़दीक है इक तुम्हीं तो हो कि जिस का दिल दुखा सकता हूँ मैं — Shariq Kaifi
हद से बढ़ कर हसीन लगते हो झूटी क़स में ज़रूर खाया करो — Abdul Hamid Adam
फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना मगर इस में लगती है मेहनत ज़ियादा — Altaf Hussain Hali
उस से बढ़ कर किया मिलेगा और इनआम-ए-जुनूँ अब तो वो भी कह रहे हैं अपना दीवाना मुझे — Hafeez Banarasi
इश्क़ कहाँ अब पहले वाला होता है इश्क़ से बढ़कर इश्क़ का चर्चा होता है — Shariq Kaifi
ज़िंदगी पर इस से बढ़ कर तंज़ क्या होगा 'फ़राज़' उस का ये कहना कि तू शाएर है दीवाना नहीं — Ahmad Faraz
टूटते रिश्तों से बढ़कर रंज था इस बात का दरमियाँ कुछ दोस्त थे, और दोस्त भी ऐसे, के बस — Renu Nayyar
वक़्त ए इफ़्तार ख़ुद रब था मेरे क़रीब तुझ से बढ़ कर मगर कुछ न माँगा गया — Afzal Ali Afzal

'बढ़कर' शब्द किसी निश्चित बिंदु से आगे जाने या किसी सीमा को पार करने को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर साधारण अनुभवों के पार जाने का प्रतीक होता है, असाधारण या दिव्य क्षेत्र में पहुँचने का।

कवि 'बढ़कर' का उपयोग मानव सीमाओं को पार करने के विचार को व्यक्त करने के लिए करते हैं, चाहे वह प्रेम में हो, महत्वाकांक्षा में, या आध्यात्मिक खोजों में। यह एक प्रकार की आकांक्षा और असीमता की भावना को जागृत करता है।

कविता में, 'बढ़कर' आत्मा को अनंत की खोज करने के लिए आमंत्रित करता है, इसे साधारण से ऊपर उठने के लिए प्रेरित करता है।