us se badh kar kiya milega aur inaam-e-junoon | उस से बढ़ कर किया मिलेगा और इनआम-ए-जुनूँ

  - Hafeez Banarasi

उस से बढ़ कर किया मिलेगा और इनआम-ए-जुनूँ
अब तो वो भी कह रहे हैं अपना दीवाना मुझे

  - Hafeez Banarasi

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    किस मुँह से करें उन के तग़ाफ़ुल की शिकायत
    ख़ुद हम को मोहब्बत का सबक़ याद नहीं है
    Hafeez Banarasi
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    जब भी तिरी यादों की चलने लगी पुर्वाई
    हर ज़ख़्म हुआ ताज़ा हर चोट उभर आई

    इस बात पे हैराँ हैं साहिल के तमाशाई
    इक टूटी हुई कश्ती हर मौज से टकराई

    मयख़ाने तक आ पहुँची इंसाफ़ की रुस्वाई
    साक़ी से हुई लग़्ज़िश रिंदों ने सज़ा पाई

    हंगामा हुआ बरपा इक जाम अगर टूटा
    दिल टूट गए लाखों आवाज़ नहीं आई

    इक रात बसर कर लें आराम से दीवाने
    ऐसा भी कोई वा'दा ऐ जान-ए-शकेबाई

    किस दर्जा सितम-गर है ये गर्दिश-ए-दौराँ भी
    ख़ुद आज तमाशा हैं कल थे जो तमाशाई

    क्या जानिए क्या ग़म था मिल कर भी ये आलम था
    बे-ख़्वाब रहे वो भी हम को भी न नींद आई
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    Hafeez Banarasi
    कोई बतलाए कि ये तुर्फ़ा तमाशा क्यूँ है
    आदमी भीड़ में रहते हुए तन्हा क्यूँ है

    पाँव फैलाए हुए ग़म का अंधेरा क्यूँ है
    आ गई सुब्ह-ए-तमन्ना तो फिर ऐसा क्यूँ है

    मैं तो इक ज़र्रा-ए-नाचीज़ हूँ और कुछ भी नहीं
    वो जो सूरज है मिरे नाम से जलता क्यूँ है

    तुझ को निस्बत है अगर नाम-ए-बराहीम से कुछ
    आग को फूल समझ आग से डरता क्यूँ है

    कौन सा अहद है जिस अहद में हम जीते हैं
    दश्त तो दश्त है दरिया यहाँ प्यासा क्यूँ है

    पी के बहकेगा तो रुस्वाई-ए-महफ़िल होगी
    वो जो कम-ज़र्फ़ है मयख़ाने में आया क्यूँ है

    कोई आसेब है या सिर्फ़ निगाहों का फ़रेब
    एक साया मुझे हर सू नज़र आता क्यूँ है

    याद किस की मह-ओ-ख़ुर्शीद लिए आई है
    शब-ए-तारीक में आज इतना उजाला क्यूँ है

    बद-हवासी का ये आलम कभी पहले तो न था
    हश्र से पहले ही ये हश्र सा बरपा क्यूँ है
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    Hafeez Banarasi
    तदबीर के दस्त-ए-रंगीं से तक़दीर दरख़्शाँ होती है
    क़ुदरत भी मदद फ़रमाती है जब कोशिश-ए-इंसाँ होती है
    Hafeez Banarasi
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    क़दम शबाब में अक्सर बहकने लगता है
    भरा हो जाम तू अज़-ख़ुद छलकने लगता है

    कोई चराग़ अँधेरों में जब नहीं जलता
    किसी की याद का जुगनू चमकने लगता है

    शब-ए-फ़िराक़ मुझे नींद जब नहीं आती
    ये किस का हाथ मिरा सर थपकने लगता है
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    Hafeez Banarasi

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