मेरी हर राह में आती वो इक अड़चन जो है मैं हूँ
मेरा दुश्मन जो था मैं था मेरा दुश्मन जो है मैं हूँ
जो ख़ुद को आइने में ग़ौर से देखा तो ये जाना
मेरी वीरान सी आँखों में सूनापन जो है मैं हूँ
मेरी आवाज़ को सुन कर नज़रंदाज़ मत करना
तुम्हारी चूड़ियों की आख़िरी खनखन जो है मैं हूँ
इसी वादे पे जाओ तुम कि वापस लौट आओगे
भले दहलीज़ हो दुनिया मगर आंँगन जो है मैं हूँ
अगर ऐसा हो तेरा दिल अचानक ज़ोर से धड़के
उसे महसूस कर लेना वही धड़कन जो है मैं हूँ
— Aditya Singh aadi














