ख़ुदा की दी हुई नेमत लकीरें हाथ में सब हैतुम्हीं को छोड़कर के बस हमारे साथ में सब हैकहे थे हाथ मेरे देख कर के इक नज़ूमी नेकि मेरे भाग्य में कुछ भी नहीं पर हाथ में सब है— Subrat Tripathi