Rupesh Rahi

Rupesh Rahi

@rupeshrana8928

Rupesh Rahi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rupesh Rahi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

1

Content

21

Likes

76

Shayari
Audios
  • Sher(4)
  • Ghazal(16)
  • Nazm(1)

Sher

निकल के ख़्वाब से तक़दीर हो जाऊँ है ख़्वाहिश सच की मैं जागीर हो जाऊँ — Rupesh Rahi
सुकूँ अपना गँवाया है किसी ने दरख़्तों को गिराया है किसी ने — Rupesh Rahi

Ghazal

ज़िंदगी जो लिख रही वो गीत गाने के लिए अश्क आँखें पी गईं हैं मुस्कुराने के लिए रूह छलनी है मगर चेहरे पे है झूठी हँसी किस क़दर लाचार हैं हम ग़म छुपाने के लिए नीचता की हद जो थीं वो तोड़ डाली हैं सभी लोग कितना गिर गए हम को गिराने के लिए एक दीया जल रहा इक कोठरी के वास्ते सब हवाएँ चल पड़ीं उस को बुझाने के लिए ठोकरें भी लाज़िमी हैं कुछ सफ़र के वास्ते कुछ तो पत्थर चाहिए हैं लड़खड़ाने के लिए खेलते हैं सब यहाँ बस जीतने के वास्ते हौसला रखना मगर तुम हार जाने के लिए रोज़गारी से ज़रूरी और भी मुद्दे हैं कुछ धर्म अव्वल है मगर पागल बनाने के लिए — Rupesh Rahi
हम जो अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ते जा रहे हैं जो अहम थे दोस्त वो सब पीछे छूटे जा रहे हैं ज़िंदगी के फ़लसफ़े में इस कदर उलझे हुए हैं ज़िंदगी जीनी भी है हम ये ही भूले जा रहे हैं पूछते हो तुम मेरे मज़बूत होने का सबब दर्द जितने भी मिले हैं हम तो सहते जा रहे हैं कुछ ज़रूरी वस्तुओं को बस इकट्ठा करते-करते जो सजाए थे कभी वो ख़्वाब बिखरे जा रहे हैं कर नहीं पाए जिन्हें हम वक़्त के रहते किसी से है वही सब बात ये जो हम तो लिखते जा रहे हैं कर दिया था कुछ ग़लत हम ने किसी के साथ राही है नहीं कुछ हाथ में सो हाथ मलते जा रहे हैं — Rupesh Rahi

Nazm