कहानी का अहम हिस्सा है ये दिल

मैं मंज़िल हूँ मेरा रस्ता है ये दिल

नहीं होता है जो तक़दीर में ही
उसी के इश्क़ में पड़ता है ये दिल

बहुत समझाया है इस को किसी ने
किसी की पर कहाँ सुनता है ये दिल

सुना है घर नहीं होता है इस का
किसी के दिल में ही बसता है ये दिल

नहीं मिलता मेरे मेआ'र से जो
गवारा ही नहीं करता है ये दिल

— Rupesh Rahi

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