वक़्त आने पे सब को बता जाएँगे

दिल में जितनी है उल्फ़त निभा जाएँगे

कोई पूछेगा जब होती है क्या वफ़ा
हम तिरंगे में सो कर दिखा जाएँगे

हम जिएँ या मरें इस का कुछ ग़म नहीं
मान अपने वतन का बढ़ा जाएँगे

राख होने से पहले ख़ुदा की क़सम
आग सीने में सबके लगा जाएँगे

जिन की ख़ुशबू रहेगी जहाँ में सदा
गुल चमन में हम ऐसे खिला जाएँगे

देख लेना किसी रोज़ शिद्दत से हम
हँसते-हँसते सभी को रुला जाएँगे

— Rupesh Rahi

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Aanch Shayari

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