Meaning of

उल्फ़त

ulfat • الفت

स्नेह; प्रेम; लगाव

affection; love; fondness

الفت; محبت; لگاؤ

Arabic

हम तो क़ायल है सिर्फ़ उलफ़त के
आग नफ़रत की हम बुझा देंगे

जो मुझे याद तक नहीं करते
उन की ख़ातिर भी जाँ लुटा देंगे

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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या

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उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है
फिर भी दीवाने को शे'र सुनाना है

सबका कर्ज अदा कर के लौटा हूँ मैं
बस इक लड़की का बोसा लौटाना है

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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

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खूब पहचान लो असरार हूँ मैं
जिंस ए उल्फ़त का तलबगार हूँ मैं

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ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए नजात
इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए

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ये यक़ीं है की मेरी उल्फ़त का
होगा उन पर असर कभी न कभी

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मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की
लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे

देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर
अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे

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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया

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ये जो लोग इतनी उल्फ़त बरसाते हैं
इतने पत्थर साथ कहाँ से लाते हैं

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हम तो क़ायल है सिर्फ़ उलफ़त के
आग नफ़रत की हम बुझा देंगे

जो मुझे याद तक नहीं करते
उन की ख़ातिर भी जाँ लुटा देंगे

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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या

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'उल्फ़त' मूल रूप से एक कोमल, गर्म स्नेह को व्यक्त करता है, एक ऐसा बंधन जो कोमल होते हुए भी गहरा होता है। कविता में, यह प्रेम की सूक्ष्म बारीकियों, जुड़ाव के शांत क्षणों और दिलों को जोड़ने वाली स्थायी गर्माहट को व्यक्त करने के लिए गहराई तक जाता है।

कवि 'उल्फ़त' का उपयोग प्रेम के कोमल और स्थायी पहलुओं की खोज के लिए करते हैं। यह अक्सर उन छंदों में प्रकट होता है जो स्नेह की शांत शक्ति का जश्न मनाते हैं, जो जुनून की अधिक उथल-पुथल भरी अभिव्यक्तियों के विपरीत है।

'उल्फ़त' में, एक को प्रेम की दी गई शांत शक्ति और स्थायी गर्माहट मिलती है।