Viru Panwar Viyogi

Viru Panwar Viyogi

@viyogi_1

Viru Panwar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Viru Panwar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher(62)
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Sher

क्या बताएँ अब तुम को हम हैं किस क़दर तन्हा जा चुकी है तन्हाई हम को छोड़ कर तन्हा — Viru Panwar Viyogi
वफ़ा का वादा निभाने में उम्र कट रही है उसे यक़ीन दिलाने में उम्र कट रही है — Viru Panwar Viyogi
जितना वक़्त लगा तेरा दिल जीतने में मुझ को इतने वक़्त में इक दुनिया जीती जा सकती थी — Viru Panwar Viyogi
कम पड़ गई ये दुनिया उन्हें रहने के लिए जिन को तुम्हारे दिल में ठिकाना नहीं मिला — Viru Panwar Viyogi
कोई तो समझाए इंसानों को ये बात लफ़्ज़ गाली के अलावा और भी हैं — Viru Panwar Viyogi
वो अगर थोड़ा कम हसीं होता तो मैं शाइर कभी नहीं होता — Viru Panwar Viyogi
ये तेरी ही मोहब्बत का असर है माँ कि घर आ कर पता करना किधर है माँ — Viru Panwar Viyogi
किसी से उस की शादी हो गई है हमारी उम्र आधी हो गई है — Viru Panwar Viyogi
था वजूद-ए-उदासी ख़तरे में फिर ज़मीं पर मुझे उतारा गया — Viru Panwar Viyogi

Ghazal

किसी को हद से ज़ियादा नहीं बनाऊँगा मैं जुगनुओं को सितारा नहीं बनाऊँगा अगर कभी मेरा आना हुआ तेरे दिल तक मैं तेरे जिस्म को रस्ता नहीं बनाऊँगा नहीं करूँगा परिंदों या पौधौं को मैं क़ैद सो कोई पिंजरा या गमला नहीं बनाऊँगा भले ही देर हो मंज़िल पे जाते जाते मुझे मैं पेड़ काट के रस्ता नहीं बनाऊँगा तुम्हारे आँसुओं से मैं बनाऊँगा मोती कि इन से झील या दरिया नहीं बनाऊँगा अगर कभी मुझे दुनिया मिली बनाने को यहाँ किसी को भी तन्हा नहीं बनाऊँगा बनाया जाएगा जो शहर काट कर जंगल मैं ऐसे शहर का नक़्शा नहीं बनाऊँगा — Viru Panwar Viyogi
तेरे हाल की मुझ को अब भी ख़बर है तुझे कुछ ख़बर है तुझे लगता होगा नहीं है मगर है तुझे कुछ ख़बर है तेरा तो सितारों की दुनिया में घर है तुझे कुछ ख़बर है ज़मीं पर दिवाना तेरा दर-ब-दर है तुझे कुछ ख़बर है तू ख़ुश है मुझे छोड़ कर पर कभी सोचा तू ने कि मेरा तेरे बाद कैसे गुज़र और बसर है तुझे कुछ ख़बर है तुझे कुछ ख़बर ही नहीं तेरे बिन कैसा है हाल मेरा किसी पंछी बिन जैसे कोई शजर है तुझे कुछ ख़बर है तुझे देखने से ही भर जाया करते थे मेरे सभी ज़ख़्म मेरे ज़ख़्मों पर अब दवा बे-असर है तुझे कुछ ख़बर है छुपा कर रखा है मेरे नाम में ही तेरा नाम मैंने किसी को पता चल न जाए ये डर है तुझे कुछ ख़बर है — Viru Panwar Viyogi