अपना भी साथ छोड़ सकता हूँ
    इस क़दर है अज़ीज़ तन्हाई

    जिस्म मेरा बना उदासी से
    और है मेरी क़मीज़ तन्हाई
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    Viru Panwar Viyogi
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    ये तन्हाई उसी की बद-दुआओं का असर है
    दुखाया था किसी लड़की का दिल बचपन में मैं ने
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    था इस क़दर हसीन वो चेहरा कि सब के सब
    आँखें बदल बदल के उसे देखते रहे
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    अपनी आँखें आँसुओं से धोने वाले
    कितने ख़ुश हैं तेरे ग़म में रोने वाले

    आशिक़ी करने लगे हम से भी पहले
    ये हमारे बा'द पैदा होने वाले
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    अपने हाथों अपनी ही बर्बादी करना
    क्या ज़रूरी है किसी से शादी करना

    दिल को उस की दीद से बहलाना या'नी
    अपने बच्चे को नशे का आदी करना
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    जब तेरा इंतिज़ार होता है
    वक़्त भी बे-क़रार होता है

    आदमी का किसी से जलना भी
    रौशनी में शुमार होता है
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    कर नहीं सकता वक़्त की चोरी
    करता रहता है जो घड़ी चोरी

    कर गया उस से बे-वफ़ाई कोई
    चोर के घर में हो गई चोरी

    इस को तो हुस्न का हुनर कहिए
    दिल चुराना नहीं कोई चोरी

    मौत का नाम दे के दुनिया से
    ख़ुदा करता है आदमी चोरी

    मेरा ग़म भी चुरा सकेगा क्या
    जिस ने की मेरी शा'इरी चोरी
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    देखना होता है उस ने भी मेरी जानिब तब
    मेरा जब उस की तरफ़ ध्यान नहीं होता है

    यार उस शख़्स की आँखें ही चली जाएँ फिर
    जो उसे देख के हैरान नहीं होता है
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    Viru Panwar Viyogi
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    मोहब्बत का दिखावा कर रहा हूँ
    तुम्हारे साथ धोखा कर रहा हूँ

    ये चौथा दिल है जिस में घर किया है
    मगर मैं इश्क़ पहला कर रहा हूँ

    यूँ आए दिन नए लोगों से मिल कर
    मैं ख़ुद को और तन्हा कर रहा हूँ

    नहीं कर पाया दुनिया दिल के जैसी
    सो दिल को दुनिया जैसा कर रहा हूँ
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    Viru Panwar Viyogi
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