अब भले साड़ी गुलाबी पहनो तुम
    साथ में बस कामयाबी पहनो तुम
    Divya 'Kumar Sahab'
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    जब पूछने पर मैं कहूँ सब ठीक है मैं ठीक हूँ
    बस देखना तुम आँखों में और हाल फिर से पूछना
    Divya 'Kumar Sahab'
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    मोहब्बत में शिकायत ये मुसलसल हो नहीं सकती
    बिना तेरे मेरे दिल देख हलचल हो नहीं सकती

    लड़े जाने यहाँ कितने समझता ही नहीं कोई
    मोहब्बत को ज़रा समझो वो मक़्तल हो नहीं सकती

    बना बैठा तुझे ही मैं मिटाने था तुझे आया
    नयन से अब तेरी तस्वीर ओझल हो नहीं सकती

    मेरी धड़कन तेरी छनछन है सीने में तेरी पायल
    वो पायल जो नहीं धड़के वो पायल हो नहीं सकती

    करूँगा क्या मिली भी गर मुझे दुनिया तेरे बदले
    तेरे बिन ज़िंदगानी ये मुकम्मल हो नहीं सकती
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    Divya 'Kumar Sahab'
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    आज इक बहती नदी को मोड़ कर के देखा है
    वक़्त के इस बाँध को अब तोड़ कर के देखा है

    जब लिखा था वो लगा था सिर्फ़ राधा कृष्ण सा
    बस हमारा नाम मैंने जोड़ कर के देखा है
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    Divya 'Kumar Sahab'
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    दूर थे दोनों कहीं पर दोनों थे छत पर खड़े
    चाँद को छलनी बना कर देखा फिर उसने मुझे
    Divya 'Kumar Sahab'
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    बे-वफ़ा जो हो गए उनको बताना है मुझे
    जो न होता बा-वफ़ा बर्बाद ख़ुद को कर लिया
    Divya 'Kumar Sahab'
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    दोस्त कहते हैं मुझे भूलो उसे आगे बढ़ो
    पर कभी बुझती नहीं है प्यास पानी के बिना
    Divya 'Kumar Sahab'
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    इस बंजर का तुम हल बनके
    बरसोगे कब तुम जल बनके

    तुम याद करो मैं निकलूँगा
    परछाई से हलचल बनके

    गर बन जाओ जो बारिश तुम
    मैं आऊँगा बादल बनके

    जो तुम बैठा लो आँखों में
    मैं बैठूँ फिर काजल बनके

    साड़ी सा पहनो मुझको तुम
    तब लहरूँ मैं आँचल बनके

    जो रख लो मुझको दिल में तुम
    रह लूँगा मैं पागल बनके

    तुम मुझको पहनो पैरों में
    मैं खनकूँ फिर पायल बनके

    तेरी बाँहों के मरहम को
    मैं रहता हूँ घायल बनके

    दिल तो तेरा दीवाना है
    अब तू भी आ कायल बनके
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    Divya 'Kumar Sahab'
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    जो तुम बैठा लो आँखों में
    मैं बैठूँ फिर काजल बनके

    साड़ी सा पहनो मुझको तुम
    तब लहरूँ मैं आँचल बनके
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    Divya 'Kumar Sahab'
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    कुछ प्रतीक्षा के जो जलते दीप आँखों में रखे थे
    बुझ गयी आँखें मगर आँसू ये सब सुलगे हुए हैं
    Divya 'Kumar Sahab'
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