मोहब्बत में शिकायत ये मुसलसल हो नहीं सकती
बिना तेरे मेरे दिल देख हलचल हो नहीं सकती
लड़े जाने यहाँ कितने समझता ही नहीं कोई
मोहब्बत को ज़रा समझो वो मक़्तल हो नहीं सकती
बना बैठा तुझे ही मैं मिटाने था तुझे आया
नयन से अब तेरी तस्वीर ओझल हो नहीं सकती
मेरी धड़कन तेरी छनछन है सीने में तेरी पायल
वो पायल जो नहीं धड़के वो पायल हो नहीं सकती
करूँँगा क्या मिली भी गर मुझे दुनिया तेरे बदले
तेरे बिन ज़िंदगानी ये मुकम्मल हो नहीं सकती
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Divya 'Kumar Sahab'
our suggestion based on Divya 'Kumar Sahab'
As you were reading Anjam Shayari Shayari