Nishant Singh

Nishant Singh

@arihantsi278764

Nishant Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nishant Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

एक हिस्सा है किसी के जिस्म का हम में,सो हम ख़ुद-कुशी भी कर नहीं सकते यूँँ अपनी मर्ज़ी से — Nishant Singh
ध्यान खो कर भी रवाँ है फ़ैशन नींद में बाल खड़ा है यारों — Nishant Singh
फिर रोक देगा कोई मुझ को गुफ़्तगू के बीच में दोबारा फिर इक बार मेरी बात टल जाएगी क्या — Nishant Singh
सिर्फ़ इतनी सी गुंजाइश है वस्ल दिखने की जैसे इत्तिफ़ाक़न बारिश में धूप दिख जाए — Nishant Singh
बारहा ये हकलाहट थोड़ा ध्यान से सुन लो हो सके तो दिल तुम सेे कुछ भी कह नहीं पाए — Nishant Singh
यक़ीन हो रहा था सब को मुझ पे रफ़्ता-रफ़्ता पर किसी ने मुझ सेे भी ज़ियादा ही दिखावा कर दिया — Nishant Singh
ख़ैरात में अब दे दिया जाए इसे हर रात नीदें ज़ाया' होती रहती हैं — Nishant Singh
अब बिछड़ने पर समझ पाते हैं हम इक दूसरे को इम्तिहाँ के ख़त्म हो जाने पे हल याद आ रहा है — Nishant Singh
बारहा हादसों से जाना है आस रखना भी एक आदत है — Nishant Singh
कोई इशारा गर हो तो रफ़्तार ये गिरे ज़ंजीर खींच ट्रेन को रोका जा सकता है — Nishant Singh

Ghazal

Nazm

ख़ुशियों से परे मैं परे हूँ अब मैं परे हूँ उन सारी चीज़ों से जो वजह होती हैं मुस्कुराहटों की कोई तस्वीर,जो कम कर देती है उदासी को किसी की याद कि जिस के सहारे लोग उम्र गुज़ार देते हैं या फ़क़त इक उम्मीद एक रोज़ सब कुछ ठीक हो जाने की मैं बाहर हो चुका हूँ इन सारे ख़यालों से ये सब एक दिन में नहीं हुआ इक सिलसिला,जो चला आ रहा था कई हफ़्तों से मुस्तकिल हो गया अपने अंजाम पर पहुंचकर और ख़त्म कर दिया मेरे अंदर से मुझ को मगर फिर भी माहौल को बदलने के वास्ते इस सूख चुके ज़िंदगी में कोई नया वाक़िया आ कर पुराने वाक़िये से ध्यान हटा देता है ख़ुशी का सबब अब सिर्फ़ इतना रह गया है कि एक भारी दुख, हल्के दुख को दबा देता है — Nishant Singh