@arihantsi278764
Nishant Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nishant Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.
Followers
1
Content
16
Likes
46
एक हिस्सा है किसी के जिस्म का हम में,सो हम
ख़ुदकुशी भी कर नहीं सकते यूँ अपनी मर्ज़ी से
यकीन हो रहा था सब को मुझ पे रफ़्ता-रफ़्ता पर
किसी ने मुझसे भी ज़ियादा ही दिखावा कर दिया
फिर रोक देगा कोई मुझको गुफ़्तगू के बीच में
दोबारा फिर इक बार मेरी बात टल जाएगी क्या
अब बिछड़ने पर समझ पाते हैं हम इक दूसरे को
इम्तिहाँ के ख़त्म हो जाने पे हल याद आ रहा है
उदास चेहरे पे इक नई उदासी छा गई
पहर से पहले बाद-ए-सबा हमें जगा गई
अजब नहीं जो लांछनों से मैं बरी न हो सकूँ
सफ़ाई देने के समय ही मुझ को नींद आ गई
दिल डरा ही देने वाले जैसे दहशत के मनाज़िर
देखता हूँ मैं ये कैसे कैसे कुदरत के मनाज़िर
कर नहीं सकती मुतासिर तुझ को मेरी शाइरी ये
तूने देखे ही नहीं हैं एक ख़ल्वत के मनाज़िर