उदास चेहरे पे इक नई उदासी छा गईपहरस पहले बाद-ए-सबा हमें जगा गईअजब नहीं जो लांछनों से मैं बरी न हो सकूँसफ़ाई देने के समय ही मुझ को नींद आ गई— Nishant Singh