
दिल डरा ही देने वाले जैसे दहशत के मनाज़िर
देखता हूँ मैं ये कैसे कैसे क़ुदरत के मनाज़िर
कर नहीं सकती मुतासिर तुझ को मेरी शा'इरी ये
तू ने देखे ही नहीं हैं एक ख़ल्वत के मनाज़िर
— Nishant Singh
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