haath men tere mere ye haath ho to baat aur hai | हाथ में तेरे मेरे ये हाथ हो तो बात और है

  - Divya 'Kumar Sahab'

हाथ में तेरे मेरे ये हाथ हो तो बात और है
नैन से साँझा सभी जज़्बात हो तो बात और है

एक जीवन का नहीं हर एक जीवन का मिलन हो
मेरे सारे जन्म तेरे साथ हों तो बात और है

चाँद बनकर तुम मिलो तो चाँदनी बन मैं मिलूँगा
चाँद से फिर चाँदनी की बात हो तो बात और है

आँख ये सोती नहीं है छाँव तेरी ढूँढ़ती है
गोद में ज़ुल्फ़ों तले ये रात हो तो बात और है

तू मेरी मेहंदी रचाती मैं तेरा सेहरा सजाता
तेरी चौखट पर मेरी बारात हो तो बात और है

ज़िंदगी के ही बिना मैं ज़िंदगी का क्या करूँँ अब
ज़िंदगी जीने के कुछ हालात हों तो बात और है

  - Divya 'Kumar Sahab'

Ehsaas Shayari

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