है मोहब्बत में क़यामत बस क़यामत के बिना
हो रहा हूँ मैं फ़ना तेरी मोहब्बत के बिना
इस दवा के और दुआ के हाथ में कुछ है नहीं
अब लगाले तू गले मुझको इजाज़त के बिना
लोग कहते हैं मुझे चल भूल जा अब तू उसे
भूल मैं सब कुछ गया तेरी इबादत के सिवा
हाथ से अपने खिला दे अन्न का इक कौर तू
भूख अब लगती नहीं तेरी इनायत के बिना
रूह को मैंने जला कर राह बस तेरी तकी
बुझ न जाए ये दिया तेरी हिफ़ाज़त के बिना
देर होते ही यहाँ सबको यक़ीं झट हो गया
क्यूँँ नहीं करता यक़ीं कोई शहादत के बिना
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