zulfon men uski taaron ko hamne chamakte dekha hai | ज़ुल्फ़ों में उसकी तारों को हमने चमकते देखा है

  - Divya 'Kumar Sahab'

ज़ुल्फ़ों में उसकी तारों को हमने चमकते देखा है
ज़ुल्फ़ें हटीं तो चाँद को हमने झलकते देखा है

उसकी तो आँखों में ही बिजली और बादल हैं बसे
आँखों से रिम-झिम प्रेम को हमने छलकते देखा है

हाथों में उसके है बसी संजीवनी जैसे कहीं
बहती नदी, कंगन को फिर हमने दमकते देखा है

जब पाँव में पायल खनकती है समुद्री फिर तभी
पूरे धरा-पाताल को हमने चहकते देखा है

वो बस हमारे पास बैठा और थामा जब हमें
अच्छी भली साँसों को फिर हमने अटकते देखा है

उसने पुकारा नाम जब आधी तो फिर धड़कन रुकी
फिर पूरे इस ब्रह्माण्ड को हमने धड़कते देखा है

  - Divya 'Kumar Sahab'

Chaand Shayari

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