हम तेरी दीवार से और दर से बातें करते हैं
इस धरा से तो कभी अंबर से बातें करते हैं
ये रहा हर पल कि तेरा कॉल आएगा कभी
तू नहीं है तो तेरे नम्बर से बातें करते हैं
हम ज़रा इग्नोर होकर सीख पाए ये हुनर
बात दिल की हो कोई तो घर से बातें करते है
आँख से जब ख़्वाब चलते हैं हक़ीक़त की तरफ
ख़्वाब चलते ही सभी ठोकर से बातें करते हैं
दिल दुखा कर दूसरों का आदमी मंदिर गया
अब ख़ुदा भी देख लो पत्थर से बातें करते हैं
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