यादों से मिलकर कुछ आपस में करता है
आँखों में आकर फिर बरसातें करता है
उन सेे मिलते ही बातें करता आँखों से
दिल सीने में कितनी आवाज़ें करता है
जग कर ये चिड़िया रोज़ सवेरा करती है
जल कर ये जुगनू देखो रातें करता है
ये दुनिया जो भी बोले पर ख़ामोशी है
वो चुप है फिर भी कितनी बातें करता है
जल उठता है यादों का बादल मुझपर जब
ये सूरज आकर मुझपर शाख़ें करता है
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