आँख में आज ये ख़्वाब सारे लिए
इन गुलाबों को तोड़ा तुम्हारे लिए
लफ़्ज़ इज़हार के जब वो समझे नहीं
नैन नम हो गए फिर नज़ारे लिए
भेंट ये फ़रवरी की रखी रह गई
माँ से मैं बात करता हमारे लिए
चाँद उतरा है छत पर किसी और के
मैं खड़ा रह गया ये सितारे लिए
रूठ जाएगा जिस दिन समंदर यहाँ
ढूँढ़ना तुम नमी फिर किनारे लिए
प्यार में हार है तो मुनाफ़ा ही है
तेज़ धड़केगा दिल अब ख़सारे लिए
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