ja raha tha vo to usne mere jee ko rakh liya | जा रहा था वो तो उसने मेरे जी को रख लिया

  - Divya 'Kumar Sahab'

जा रहा था वो तो उसने मेरे जी को रख लिया
वो गया मैंने तभी उसकी कमी को रख लिया

साँस बस ये चल रही है इसलिए है ज़िंदगी
उसने मेरी जान मैंने ज़िंदगी को रख लिया

थी जहाँ मेरी जगह उसने दिया मुझको हटा
अपने को ही छोड़ उसने अजनबी को रख लिया

हाँ जुड़ी थी हर ख़ुशी ये साथ उसके ही मेरी
उसने फिर मेरी ख़ुशी मैंने हँसी को रख लिया

चाहता था रोकना पर कुछ नहीं था हाथ में
मैंने अपना प्यार उसने बरहमी को रख लिया

  - Divya 'Kumar Sahab'

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