ठीक कर लूँ हाल मैं अपना मगर किसके लिए
पोछ लूँ अब गाल मैं अपना मगर किसके लिए
गिर गए कुछ ख़्वाब तो रूमाल मेरा जल उठा
फेंक दूँ रूमाल मैं अपना मगर किसके लिए
क्या करूँँ मैं इस धरा पर कुछ बता दे ज़िंदगी
अब बिता लूँ साल मैं अपना मगर किसके लिए
अब बची है राख देखो जल गया सारा चमन
फिर उगा लूँ शाल मैं अपना मगर किसके लिए
आँख में तुम देख लो भूचाल फिर से आ गया
रोक लूँ भूचाल मैं अपना मगर किसके लिए
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