मिरे ही वास्ते लाया है दोनो फूल और खंजर
    मुझे ये देखना है बस वो पहले क्या उठाता है

    Parul Singh "Noor"
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    अभी तो जान कहता फिर रहा है तू
    तुझे हम हिज्र वाले साल पूछेंगे

    Parul Singh "Noor"
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    सूख जाता जल्द है फिर भी निशानी के लिए
    फूल इक छुप के किताबों में छिपाना इश्क़ है

    Parul Singh "Noor"
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    वो बुज़ुर्गों की बताई तो कहीं मिलती नही
    अब दुखों को झेलती ही बस जवानी रह गई

    Parul Singh "Noor"
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    सभी रिश्तें मैं यूँ बचाए हूँ जैसे
    तड़पते दियों को हवा देते रहना

    Parul Singh "Noor"
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    आसमाँ से गरज छेड़ती है हमें
    एक बारिश में भी भीगे थे साथ हम

    Parul Singh "Noor"
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    झुके तो जन्नत उठे तो खंजर
    करेंगी हम को तबाह आँखें

    Parul Singh "Noor"
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    थी इक वक़्त अब शाइरी बस बची है
    यकीं करना मुझमे मुहब्बत नही है

    Parul Singh "Noor"
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    जियूँगी किस तरह तेरे बिना मत फिक्र कर इसकी
    गुज़रती जिस शहर से हूँ दिवाने छोड़ आती हूँ

    Parul Singh "Noor"
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    बस हो मयखाना मिरा अंजाम साक़ी
    आज तय कर ले हज़ारों शाम साक़ी

    आज टूटा दिल बहुत है ग़म ज़ियादा
    आ गया है अब ले तेरा काम साक़ी

    गूँजती तारीफ़ उसकी मय-कदे में
    होता जो महबूब का हमनाम साक़ी

    पी रहे है नाम ले लेके तिरा हम
    तू कभी तो ले ले मेरा नाम साक़ी

    पी रहे है हम नज़र से हमसफर की
    कर दे मयख़ाने को अब नीलाम साक़ी

    देखते है अब सभी अंदाज़ तेरे
    ये अदा भी हो न जाए आम साक़ी

    है ख़फा तो मयकदे का वास्ता है
    यूँ न खाली छोड़ मेरा जाम साक़ी

    Parul Singh "Noor"
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