bas ho maykhaana miraa anjaam saaqi | बस हो मयखाना मिरा अंजाम साक़ी

  - Parul Singh "Noor"

बस हो मयखाना मिरा अंजाम साक़ी
आज तय कर ले हज़ारों शाम साक़ी

आज टूटा दिल बहुत है ग़म ज़ियादा
आ गया है अब ले तेरा काम साक़ी

गूँजती तारीफ़ उसकी मय-कदे में
होता जो महबूब का हमनाम साक़ी

पी रहे है नाम ले लेके तिरा हम
तू कभी तो ले ले मेरा नाम साक़ी

पी रहे है हम नज़र से हम सेफर की
कर दे मयख़ाने को अब नीलाम साक़ी

देखते है अब सभी अंदाज़ तेरे
ये अदा भी हो न जाए आम साक़ी

है ख़फा तो मयकदे का वास्ता है
यूँँ न ख़ाली छोड़ मेरा जाम साक़ी

  - Parul Singh "Noor"

Romance Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Parul Singh "Noor"

As you were reading Shayari by Parul Singh "Noor"

Similar Writers

our suggestion based on Parul Singh "Noor"

Similar Moods

As you were reading Romance Shayari Shayari