hazaaron baar ye naadaan dil bas toot jaata hai | हज़ारों बार ये नादान दिल बस टूट जाता है

  - Parul Singh "Noor"

हज़ारों बार ये नादान दिल बस टूट जाता है
इसी इक आस में के जाने वाला लौट आता है

मिरे ही वास्ते लाया है दोनों फूल और ख़ंजर
मुझे ये देखना है बस वो पहले क्या उठाता है

मुहब्बत की दिनों में तो मुझे वो जान कहता था
बिछड़ कर हिज्र में देखूँ वो क्या कह कर बुलाता है

उसे घर पे सड़क पे कोठों पे बैठा दिया अक्सर
जिसे बातों में अक्सर आदमी देवी बताता है

बता अब हिज्र को भी हो गए दो साल कैसा है
मैं तो बर्बाद ही हूँ खैर तेरा क्या ही जाता है

  - Parul Singh "Noor"

Breakup Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Parul Singh "Noor"

As you were reading Shayari by Parul Singh "Noor"

Similar Writers

our suggestion based on Parul Singh "Noor"

Similar Moods

As you were reading Breakup Shayari Shayari