मिरी जाँ इतना भी हमें सताया तो न कीजिए

क़रीब आ के दूर हम से जाया तो न कीजिए

हज़ार पहरे है मिरी हयात और इश्क़ पर
सो आप यूँ बे-वक़्त मिलने आया तो न कीजिए

न हो सकोगे आप ज़िन्दगी कभी मिरी सनम
अगर ये सच भी है मुझे बताया तो न कीजिए

ये जानती हूँ इश्क़ है तुम्हें, तो मेरी ज़ुल्फ को
यूँ महफिलों में चहरे से हटाया तो न कीजिए

हमारी जान सीने से सनम निकल ही जाती है
नज़र मिला के हम से फिर चुराया तो न कीजिए

सवाल इश्क़ के करूँ जवाब दे दिया करें
इधर उधर की बातें तब बनाया तो न कीजिए

चले ही जाना है अगर मुझे अकेला छोड़ कर
तो कम से कम ये इश्क़ अपना ज़ाया' तो न कीजिए

— Parul Singh "Noor"

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