फिर गली कोई तुझ तक न लाई मुझे
कितनी अच्छी लगी थी रिहाई मुझे
तू कहेगा सही तो भी होगा ग़लत
बेहतर है न ही दे सफ़ाई मुझे
पहले तो इश्क़ मैं ने किया टूट कर
आ गई करनी फिर बेवफाई मुझे
मैं नदी तो वो मुझ
में थी बहती लहर
लड़की फिर भी न वो रास आई मुझे
तीरगी से मुझे कुछ मुहब्बत नहीं
महज़ जचती नहीं रौशनाई मुझे
— Parul Singh "Noor"















