फिर गली कोई तुझ तक न लाई मुझे
कितनी अच्छी लगी थी रिहाई मुझे
तू कहेगा सही तो भी होगा ग़लत
बेहतर है न ही दे सफाई मुझे
पहले तो 'इश्क़ मैंने किया टूटकर
आ गई करनी फिर बेवफाई मुझे
मैं नदी तो वो मुझ
में थी बहती लहर
लड़की फिर भी न वो रास आई मुझे
तीरगी से मुझे कुछ मुहब्बत नहीं
महज़ जचती नहीं रौशनाई मुझे
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