वो अपने दिल को मैं ने ख़त लिखा था ना
तू ही कहता था वो तेरा पता था ना
हुई थी कल छुवन महसूस गालों पर
मिरी तस्वीर को तुम ने छुआ था ना
वहीं पहली नज़र का प्यार हो बैठा
घड़ी में जब मिरा आँचल फँसा था ना
अगर ग़ुस्से में जाता लौट आता वो
नहीं लौटेगा मुस्का कर गया था ना
बहुत आसान था उन को जला देना
घरों में जिन में पहले से धुआँ था ना
— Parul Singh "Noor"















