दिल-ए-सोज़ाँ को भी महका रहे हैं हमें जो ख़्वाब तेरे आ रहे हैंतेरे शैदाई पागल हो चुके हैंतिरी तस्वीर चूमें जा रहे हैं— Siddharth Saaz