किसी को हद से ज़ियादा नहीं बनाऊँगा
मैं जुगनुओं को सितारा नहीं बनाऊँगा
अगर कभी मेरा आना हुआ तेरे दिल तक
मैं तेरे जिस्म को रस्ता नहीं बनाऊँगा
नहीं करूँगा परिंदों या पौधौं को मैं क़ैद
सो कोई पिंजरा या गमला नहीं बनाऊँगा
भले ही देर हो मंज़िल पे जाते जाते मुझे
मैं पेड़ काट के रस्ता नहीं बनाऊँगा
तुम्हारे आँसुओं से मैं बनाऊँगा मोती
कि इन से झील या दरिया नहीं बनाऊँगा
अगर कभी मुझे दुनिया मिली बनाने को
यहाँ किसी को भी तन्हा नहीं बनाऊँगा
बनाया जाएगा जो शहर काट कर जंगल
मैं ऐसे शहर का नक़्शा नहीं बनाऊँगा
— Viru Panwar Viyogi














