जाने मेरा मुक़द्दर कब सँवरेगा हाथों से उस केखिल जाते हैं जिस के छूने से मुरझाए हुए फूलऔर किसी से किया इज़हार मेरे शेरों से उस नेऔर किसी को दिए मेरे गुलशन से चुराए हुए फूल— Viru Panwar Viyogi