तुम्हारा ग़म हमारे काम आने लग गया हैहमारा शाइरों में नाम आने लग गया हैवो अब रखने लगी है लब किसी और के लबों परहमारे होंठों तक भी जाम आने लग गया है— Viru Panwar Viyogi