बस इसी बात का मुझे डर थाउस का महबूब मुझ से बेहतर थामैं जिसे ढूँढ़ता था शहर में वोकिसी के साथ उस के घर पर थाएक मेरे अलावा दुनिया मेंहर किसी का किसी से चक्कर थाठीक कहता था फ़ारिहा तेरा 'जौन'वस्ल से इंतिज़ार बेहतर था— Viru Panwar Viyogi