बस इसी बात का मुझे डर था
उस का महबूब मुझ से बेहतर था
मैं जिसे ढूँढ़ता था शहर में वो
किसी के साथ उस के घर पर था
एक मेरे अलावा दुनिया में
हर किसी का किसी से चक्कर था
ठीक कहता था फ़ारिहा तेरा 'जौन'
वस्ल से इंतिज़ार बेहतर था
— Viru Panwar Viyogi
उस का महबूब मुझ से बेहतर था
मैं जिसे ढूँढ़ता था शहर में वो
किसी के साथ उस के घर पर था
एक मेरे अलावा दुनिया में
हर किसी का किसी से चक्कर था
ठीक कहता था फ़ारिहा तेरा 'जौन'
वस्ल से इंतिज़ार बेहतर था
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