मुझ से मत पूछो कैसा हूँ
तुम से बिछड़ के भी हँसता हूँ
कोई अक्स नहीं है मेरा
तेरे साए का साया हूँ
केवल अच्छा मत कह मुझ को
अच्छे अच्छों से अच्छा हूँ
मुझ को भूलने की आदत है
तुम को भूलना भूल गया हूँ
तेरे बाद तेरी ख़ुशबू को
फूलों में भरता रहता हूँ
जचता होगा तुम पे हर रंग
रंगों पर तो मैं जचता हूँ
तुझ को नहीं फ़ुर्सत मिलने की
और मैं फ़ुर्सत का लम्हा हूँ
— Viru Panwar Viyogi















